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Monday, February 7, 2011

जिज्ञासा - १

बच्चो, विज्ञान से संबंधित कुछ रोचक प्रश्नोत्तर नीचे दिए जा रहे हैं जो तुम्हारे ज्ञान में वृद्धि करने में सहायक सिद्ध होंगे।


१.मीठी नींद तनाव और अवसाद को दूर क्यों कर देती है?
उत्तर- मीठी नींद शरीर को मानसिक तौर पर तो स्वस्थ रखती ही है, शारीरिक थकान से भी छुटकारा दिलाती है। एक शोध में कहा गया है कि यह याद्दाश्त को बेहतर बनाने में मददगार है तथा भूख को प्रभावित व नियंत्रित करने वाले हारमोन्स का भी नियमन करती है। पर्याप्त नींद की कमी शरीर में तनाव और अवसाद पैदा करने वाले कारकों को जन्म देती है। मीठी नींद से ही तनाव बढ़ाने वाले हारमोन्स का स्तर कम होता है एवं पाचन तंत्र चुस्त-दुरुस्त बना रहता है। यह रक्तचाप को नियंत्रित करके वजन बढ़ाने में भी भूमिका निभाती है।


२.नारियल तेल खूबियों से लबरेज क्यों होता है?
उत्तर- नारियल तेल के फायदे इसकी सुगंध व स्वाद से भी बढ़कर होते हैं। इस तेल में कोलेस्ट्रॉल नहीं होता। इसमें मीडियम चेन ट्राईग्लीसिराइड्स होते हैं जो शरीर में सरलता से अवशोषित हो जाते हैं। तेल में विद्यमान अधिकतर सैचुरैटिड फैट आसानी से पच जाता है और ऊर्जा में तबदील हो जाता है। इससे मोटापे से ग्रस्त होने की संभावना कम हो जाती है। यह शरीर में कोलेस्ट्रॉल को कम करता है तथा थायरॉइड ग्रन्थि को सक्रिय करने में सहायक है।


३.नवजात शिशु के लिए मां का दूध अमृत तुल्य क्यों होता है?
उत्तर- प्रारम्भिक चार से दस दिनों तक निकलने वाला मां का दूध बच्चे के लिए सर्वोत्तम आहार होता है। यह दूध अधिकाधिक प्रोटीन से युक्त होने के कारण शरीर की प्रतिरोधक क्षमता में अप्रत्याशित बढ़ोतरी करता है। मां के दूध में प्रचुर मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है जो नवजात शिशु को विभिन्न संक्रमणों (डायरिया, एलर्जी, कान संबंधी विकार) से बचाता है। यह बच्चे के मस्तिष्क का भी विकास करता है।


४.नाखूनों को दांतों से कुतरना हानिकारक क्यों रहता है?
उत्तर- अधिकांश दांतों से नाखूनों को कुतरते रहते हैं जो हानिकारक होता है। वे तनाव कम करने, खाली समय गुजारने एवं शरीर की फालतू ऊर्जा का उपयोग करने के लिए ही शायद ऐसा करते हैं। लेकिन नाखूनों को दांतों से कुतरने से इनमें भरी मैल पेट में पहुंच जाती है जो कई बीमारियों की जनक है। नाखून कुतरने की आदत व्यक्तित्व-विकास में भी बाधक होती है। इस आदत को सभ्य समाज में अच्छी नज़रों से नहीं देखा जाता है।
दैनिक ट्रिब्यून,घमंडीलाल अग्रवाल